पंछी

कभी-कभी पंछी की तरह उड़ने को जी चाहता है ।
इस दुनिया को एक पंछी की नजर से देखने को जी चाहता है ।
खुशी से भरे मन को ,
जीवन को जीने के जज्बे को ,
दृढ़ता से कार्य करने को ,
कभी ना हार मानने को जी चाहता है।
कभी-कभी पंछी की तरह उड़ने को जी चाहता है ।
उमंग और तरंग से भरे मन को ,
सच्चे लोगों के बीच रहने को,
सभी भेदभाव भूलने को,
चिंता फिक्र से दूर रहने को जी चाहता है।
कभी-कभी पंछी की तरह उड़ने को जी चाहता है ।
अपनों का प्यार पाने को ,
इस देश की गलियों में घूमने को ,
बस !!!खुशी से झूमने को जी चाहता है।
कभी-कभी पंछी की तरह उड़ने को जी चाहता है।
इस दुनिया को एक पंछी की नजर से देखने को जी चाहता है।

दीप्ति जोशी

6 thoughts on “पंछी

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